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Thursday, September 15, 2011

कहानी :समझदार चूहा

 समझदार चूहा

एक दिन की बात है एक चूहा झूला झूल रहा था | वहीँ पर एक दिन बिल्ली आ गयी और बोली वाह, कितना अच्छा भोजन मिल गया | चूहा बोला नही - नहीं बिल्ली मौसी मुझे मत खाओ  मै नन्हा मुन्हा चूहा हूँ | मै अभी पढ़ना लिखना और खेलना चाहता हूँ | तुम अगर मुझे खा लोगी तो मै पढ़ लिख कर आगे नहीं बढ़ सकूंगा | बिल्ली को रोना आ गया और बिल्ली चूहे से बोली बेटा तुम खूब पढ़ो लिखो मै तुम्हे नहीं खाऊँगी मै अपना भोजन  दूसरा ढूंढ लूंगी | चूहा कूदता फांदता चला गया और बिल्ली अपना दूसरा भोजन ढूँढने चली गयी | फिर बिल्ली को एक और मोटा ताजा चूहा मिला और बिल्ली ने उसे खा लिया | उसका पेट भर गया और बिल्ली अपने घर चली गयी और चूहा ख़ुशी  ख़ुशी खेलने लगा |
 नाम : ज्योति 
कक्षा : 5th 
सेंटर : अपना स्कूल , धामीखेड़ा
 

Monday, July 11, 2011

कविता : फल और सब्जियां

फल और सब्जियां
हरा , मुलायम सबसे सस्ता ,
है ये हरे पालक का  पत्ता .....|
हैं ये गाजर नारंगी और पीली,
मीठी मीठी और रंग रंगीली ..|
दातों को ये मजबूत है बनाती ,
आँखों की ये है ज्योति बढ़ाती |
शहरों में भरा है पानी बदबूदार,
करता है ये हम सबको बीमार .|
हम जीवन का एक लक्ष्य बनाये,
पेड़ पौधे हम सब सदा लगायें....|
नाम : पिंटू कुमार
कक्षा : 1st
सेंटर : अपना स्कूल , सरन भट्ठा

Sunday, June 26, 2011

कविता : बंदर मामा

बंदर मामा 
बंदर मामा चले विदेश.........,
पहन के अपने देश का वेश .|
तन पर कुरता पहन पजामा ...............,
इसी लिए कहते हम उनको बंदर मामा .|
चल रहे वो सीना तान ..,
यही उनके देश की शान .|



नाम : ज्योति 
कक्षा : 4th
सेंटर : अपना स्कूल , धामीखेड़ा

Wednesday, June 22, 2011

कहानी : मारवती

 मारवती 
एक बहुत पुराने गाँव के किनारे पर एक महल था , जिस महल में राजा और रानी ख़ुशी से अपना जीवन व्यतीत करते थे | लेकिन रानी साहिबा संतान न होने के कारण से चिंतित रहती थीं | कुछ दिनों के बाद राजा के पास खबर आयी कि रानी ने एक पुत्री को जन्म दिया है | राजा ऐसी खबर सुनते ही नाचने- कूदने लगा | थोड़ी देर बाद  राजा के पास रानी के मरने की खबर आयी | राजा खबर सुनकर भौचक्का रह गया | तब से रानी की पुत्री का नाम मारवती पड़ गया | रानी के मरने के बाद राजा चिंतित रहने लगे | प्रजा को अपने राजा की उदासी देखी नहीं जा रही थी , इस कारण प्रजा ने उनसे दूसरा विवाह कर लेने की सलाह दी  , राजा बहुत ही मुश्किल में तैयार हुए और शादी कर ली | नयी वाली रानी मारवती को हमेशा मारा करती थीं | राजा की  प्रजा ने देखा और राजा से बात की तो राजा ने उनसे कहा की अब तो भुगतना ही पड़ेगा | कई साल बीत गए और मारवती अब शादी के लायक हो गयी | राजा ने उसका विवाह एक राजा के साथ कर दिया | अब सौतेली माँ ने उसको मारना छोड़ दिया और उसको राजा के साथ विदा कर दिया | अब से वह उसे ही अपनी बेटी मानने लगी | 


नाम : ज्योति 
 कक्षा : 4th  
सेंटर : अपना स्कूल 
          धामीखेड़ा कानपुर