Tuesday, May 15, 2018

ईट – भट्टों पर बढ़ती पानी की समस्या

कानपुर के ईट – भट्टों पर काम करने वाले श्रमिकों की दयनीय स्थिति. ये श्रमिक जिन भट्टों पर रहते हैं, वहां पर न उनके रहने की कोई व्यवस्था होती है ,न पीने के पानी की और न ही शौचालय की .
विजया रामचंद्रन दीदी की मजदूरों के साथ बैठक के दौरान गंदे पानी की समस्या सामने आयी. हम सबको इस समस्या पर गंभीरता से विचार व कार्य करने की जरूरत है.
टयूबवेल से कच्चे गड्ढे में पानी भर देते है जिसमें पूरा कीचड़ होता है. यही पानी इन श्रमिकों का परिवार बर्तन धोने ,नहाने और कभी –कभी पीने में भी प्रयोग करता है . यही पानी की इनकी व्यवस्था होती है .
यह एक बड़ी वजह है कि श्रमिक परिवार प्रायः बीमार रहता है. यदि भट्टा मालिक इन गड्ढों को पक्का करा दें तो परिवारों को स्वच्छ पानी मिल सकता है .

Monday, May 14, 2018

मातृ दिवस पर  दैनिक जागरण कानपुर ने "अपना स्कूल " के पूर्व छात्र Mukesh Kumar Kumar की माता जी मुन्नी देवी के ऊपर स्टोरी प्रकाशित की है।
http://epaper.jagran.com/…/13-may-2018-64-edition-Kanpur-Pa…
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Saturday, December 23, 2017

टिम -टिम करते तारे

टिम -टिम करते आसमान में,
कितने सारे तारे हैं। 

इनको देखो तो लगता है, 
जग मे सबसे न्यारे हैं। 

नीले - पीले  कुछ चमकीले,
ये तो प्यारे- प्यारे हैं। 

गिंनती नहीं है तारो की,
हो सेना जैसे हजारों की। 

रात  भर ये जगते हैं,
सबसे  बातें करते हैं। 

न जाने सूरज मामा से ये क्यों इतना डरते है, 
फिर भी देखो आसमान हरदम हॅसते रहते हैं। 

नाम - नंदिनी 
कक्षा - 4 
(अपना स्कूल तातियागंज)

सब्जियां बोली

आलू बोला मुझको खालो,
मैं तुमको मोटा कर दूंगा। 

पालक बोली मुझको खालो,
मैं तुमको ताकत दे दूँगी। 

बैगन , गोभी ने मुँह खोले, 
शलजम, गाजर,मटर भी बोले।

अगर हमें भी खाओगे,
तो खूब बड़े हो जाओगे। 

नाम : जूली 
कक्षा : 4 
(अपना स्कूल तातियागंज)

बेटियाँ


हम बेटियाँ क्या है ? हमें कोई नहीं जानता।  
हम है दुनिया के उजाले ,यहाँ हमें कोई नहीं पहचानता। 

दुनिया करती है अपने ऐशो अराम की खोज। 
लेकिन दुनिया हम बेटियों को, समझती अपने सिर का बोझ। 

हमारा कोई साथ दे या न दे ,चलना हमें है आता।  
बस हमें है जन्म देने वाली माँ की जरुरत । 

माँ मत करना भ्रूण हत्या ,होकर मजबूर। 
माँ हम बेटियों को दुनियाँ देखनी है जरूर। 

करने है हमे कुछ काम ऐसे, जिसमे हो कुछ साथी सच्चे। 
अगर ऐसी माँ हो सबके पास ,तो कितने खुश हो सारे बच्चे। 

हम बेटियों की हो, हमारी खुद की अपनी पहचान। 
हमारे काम से ही जाने ,हमे ये धरती और आसमान ।  

                                                                                        नाम - हेमा 
                                                                     कक्षा -  9 
                                                                     (अपना स्कूल तातियागंज)